Divine Cupboard...
Tuesday, October 30
त्रिवेणी
सर्द सुबह को कुछ यूँ काटा जाए,
कोहरे को हटा कर किरणों को छांटा जाए।
कुदरत है या फलसफा-ए-ज़िन्दगी।
_________________
नया सवेरा, नया दिन,
फिर एक शाम तेरे बिन।
तुम जबसे गयी हो, रातें नहीं गिनता मैं।
___________________________
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment