आज फिर सोया हुआ देश जागा है,
आज फिर एक लड़की ने देह त्यागा है।
सुनो!
अब अपनी ऊँगली-अंगूठे से आँखों को फाड़े रखना,
इन बुरे सपनों से बचना है तो, चक्कु-छूरी सिरहाने रखना,
बस अब तक इन्हीं सब से तो मन को बहलाया है,
सब ठीक हो जाएगा कहकर खुद ही को सूली पर टांगा है,
लेकिन!
अब उठना होगा,
मारने होंगे ठन्डे थपेड़े पानी के,
मरोड़ने होंगे कान उस स्वार्थी के,
जो मोमबत्ती लिए हुए भी अंधकार में है,
जो मुझमें है, तुम में है,
और जो जाने-अनजाने अहंकार में है।
अरे उठो!
उसे थोड़ा साहस दो, एहसास दो,
प्यार, होंसला और विश्वास दो,
उसे 'ज्ञान' रुपी हनुमान-चालीसा कंठस्त करा दो,
नानी कहती थीं,
इसे सुनकर हर शैतान भागा है।
आज फिर सोया हुआ देश जागा है,
आज फिर एक लड़की ने देह त्यागा है।
R.I.P DAMINI.!
'दीप '
'दीप '
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