Divine Cupboard...
Monday, November 9
Silvery
चलो छोड़ो भी! अब कौन जाए,
धन-तेरस की बाज़ारी करने।
तूने ख्वाब में अाकर मेरी चांदि कर दी।
'दीप'
Thursday, August 27
मनी प्लांट
तुम्हें याद है!
तुम अपनी बिखरी लटों को कान के पीछे लगा लेती थी,
और मैं फिर से उन्हें खोल देता था,
उड़ते रहने के लिए।
अाज माली काका ने छज्जे से लटकते मनी प्लांट को बांस से अटका दिया।
अब उनपे मेरा हक कैसे जताउं।
"दीप"
Monday, August 10
Amen.!
तुम्हे देख के गिरा था तारा भी टूट के,
और मीच के आँखें लोगों ने दुआऐं कर ली।
Saturday, June 27
the canvas
बिस्तर पर यूँ चली उंगलियां रात भर,
के सिलवटों ने तेरा अक्स उकेर दिया,
फिर सुबह खिड़की से एक लम्बी किरण आई
कूँची बन कर,
रंग सुनेहरा उसमें भरने को।
यूं ही रोज़ थोड़ा थोड़ा तराशता रहता हूँ तुझे,
बिस्तर बिखरा पड़ा है मेरा,
तेरी तस्वीर मुकम्मल होने तक।
दीप
Wednesday, May 20
सफ़र
अंटी में छुपा रखे हैं आँसूं,
थोड़े जज़्बात जुराबों में हैं,
सिरहाने लगा लूंगा यादों का तकिया,
रात तन्हा होने पर,
और कुछ चिल्लर खुशियाँ तो है ही,
ऊपर वाली जेब में,
ज़िंदगी के सफ़र में खर्चने के लिए।
'दीप'
Sunday, May 17
गणित
कौन कहता है गणित में कमज़ोर था में,
बरनी में रखे एक-एक कंचे का हिसाब था मेरे पास।
'दीप'
Odyssey
मैंने कश्ती से यूँ ही पूछा था
मौसम का मिजाज़,
उसने बेबाकी से मेरा हाथ पकड़ा और कहा -
चलो लहरों के बीच चलकर देखते हैं।
बस फिर क्या था!
लहरों के उतार चढ़ाव नापते-नापते
कश्ती से मोहब्बत हो गयी।
कम्पास की सुई भी सौतन की तरह जल-भुन गयी है,
देखो, जंग लग गया है उसमें।
अब हवा का रूख़ नहीं देखता मैं।
'दीप'
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