Wednesday, May 20

सफ़र


अंटी में छुपा रखे हैं आँसूं,
थोड़े जज़्बात जुराबों में हैं,
सिरहाने लगा लूंगा यादों का तकिया,
रात तन्हा होने पर,
और कुछ चिल्लर खुशियाँ तो है ही,
ऊपर वाली जेब में,

ज़िंदगी के सफ़र में खर्चने के लिए। 


'दीप'

No comments:

Post a Comment