Wednesday, May 20

सफ़र


अंटी में छुपा रखे हैं आँसूं,
थोड़े जज़्बात जुराबों में हैं,
सिरहाने लगा लूंगा यादों का तकिया,
रात तन्हा होने पर,
और कुछ चिल्लर खुशियाँ तो है ही,
ऊपर वाली जेब में,

ज़िंदगी के सफ़र में खर्चने के लिए। 


'दीप'

Sunday, May 17

गणित

कौन कहता है गणित में कमज़ोर था में,
बरनी में रखे एक-एक कंचे का हिसाब था मेरे पास।


'दीप'

Odyssey

मैंने कश्ती से यूँ  ही पूछा था
मौसम का मिजाज़,
उसने बेबाकी से मेरा हाथ पकड़ा और कहा -
चलो लहरों के बीच चलकर देखते हैं। 

बस फिर क्या था!
लहरों के उतार चढ़ाव नापते-नापते 
कश्ती से मोहब्बत हो गयी। 

कम्पास की सुई भी सौतन की तरह जल-भुन गयी है,
देखो, जंग लग गया है उसमें।

अब हवा का रूख़ नहीं देखता मैं। 

'दीप'